Home भारत गुजरात चुनाव का एलान होते ही कांग्रेस जागी: पी. चिदंबरम का हमला,​​बीजेपी के इशारे पर काम करता है चुनाव आयोग, मोरबी आपदा के बाद सरकार ने नहीं मांगी माफ़ी

गुजरात चुनाव का एलान होते ही कांग्रेस जागी: पी. चिदंबरम का हमला,​​बीजेपी के इशारे पर काम करता है चुनाव आयोग, मोरबी आपदा के बाद सरकार ने नहीं मांगी माफ़ी

by Mahesh Patel
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senior Congress leader P Chidambaram on Tuesday hit out at the BJP over its "arrogance", saying no one so far has apologised or resigned for the Morbi bridge collapse tragedy which claimed 135 lives.

Gujarat Legislative Assembly Elections: आज अहमदाबाद में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. मोरबी पुल घटना पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने बीजेपी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, मोरबी पुल गिरने की घटना से गुजरात का नाम शर्मसार हुआ है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुल हादसे के लिए अब तक सरकार ने माफी नहीं मांगी और न ही किसी ने जिम्मेदारी स्वीकार कर इस्तीफा दिया है. मैंने रविवार को एक कॉलम लिखा, जिसका शीर्षक था “नो माफी, नो रिजाइनेशन”। इस कॉलम में सात प्रश्न उठाए गए हैं। मैं आशा करता हूँ कि हाईकोर्ट ये मुद्दे उठाए ।

बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है चुनाव आयोग

अहमदाबाद में मौजूद कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बीजेपी सरकार और चुनाव पर निशाना साधा है. उन्होंने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग बीजेपी को सपोर्ट कर रहा है. यह भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। इसलिए हिमाचल प्रदेश और गुजरात में अलग-अलग चुनाव की घोषणा क्यों की गई? हिमाचल के साथ-साथ गुजरात में भी चुनाव की तारीख का ऐलान क्यों नहीं हुआ था? गुजरात में औसत मजदूरी दर देश में सबसे कम है। गुजरात के लोगों से मेरी अपील है कि ‘सरकार बदलने के लिए वोट करें. यहां अशिक्षित युवा और कम पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार हैं।

मोरबी आपदा के बाद जवाबदेही का संपूर्ण अभाव

पी चिदंबरम ने कहा कि मैंने आपको कुछ उदाहरण दिए हैं, यह दिखाने के लिए कि भाजपा द्वारा बनाए गए धुएं के पीछे कितनी भयानक वास्तविकताएं हैं। कोई भी सरकार – और कोई भी पार्टी – लोगों के प्रति जवाबदेह और जिम्मेदार तभी होगी जब उन्हें चुनाव हारने का डर हो, यही वजह है कि सभी परिपक्व संसदीय लोकतंत्रों में लोग हर कुछ वर्षों में सरकार बदलते हैं। गुजरात को दो दशक से अधिक समय से केवल एक ही सरकार होने का खामियाजा भुगतना पड़ा है, इसलिए सरकार को लगता है कि वह लोगों के प्रति जिम्मेदार नहीं है। मोरबी त्रासदी के बाद जवाबदेही का पूर्ण अभाव ये एक उदाहरण है

देश में घटेगा विदेशी निवेश

देश में मंदी नहीं आएगी, लेकिन विकास धीमा रहेगा। बाहर से आने वाले निवेश में कमी आएगी। रुपये में गिरावट से खपत घटेगी। इस मुद्दे पर केवल सार्वजनिक निवेश ही देश को बचा सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इसमें क्या करती है। पि चिदंबरम ने पीएम मोदी पर हमला बोला. उन्होंने कहा, गुजरात की सरकार वहां के मुख्यमंत्री से नहीं, बल्कि दिल्ली से चलती है। इस बीच चिदंबरम ने आम आदमी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “यदि आप दिल्ली में वायु गुणवत्ता में विश्वास करते हैं, तो गुजरात में अरविंद केजरीवाल को वोट न दें।”

उच्च निवेश का दावा अतिशयोक्ति है

2003 के बाद से वाइब्रेंट गुजरात कन्वेंशन के माध्यम से उच्च निवेश का दावा एक अतिशयोक्ति है। 2011 के पहले पांच सम्मेलनों के लिए केवल डेटा जारी किया गया है। आंकड़े सही तस्वीर दिखाते हैं। 2020-21 में राज्य का कुल कर्ज 2,98,810 करोड़ रुपये या 18.04 प्रतिशत था। आरबीआई के अनुसार, 2022 में राज्य की कुल बकाया देनदारी रु 4.02,785 करोड़ थी गुजरात के सामाजिक-आर्थिक आंकड़े मिश्रित हैं और कुछ चिंताजनक विशेषताएं हैं। गुजरात की जनसंख्या भारत की जनसंख्या का 5% है।

चेतावनी: हम इस जानकारी को विभिन्न स्रोतों से एकत्र करते हैं और आपको केवल इसके बारे में अवगत कराने का प्रयास करते हैं। यह वेबसाइट या पेज यह दावा नहीं करता है कि लेख में लिखी हुई सब जानकारी पूरी तरह से सत्य है। हम आपको केवल आपके ज्ञान के लिए जानकारी देते हैं।

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